ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare · Vishnu Aarti (विष्णु)

The most widely sung aarti in North India. Many homes close every evening puja with it, and it is the aarti of the Satyanarayan Katha.

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

दीनबन्धु दुःखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।

अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे… ॥

Written by
Pandit Shardha Ram Phillauri (c. 1870)
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Some editions print “मैं मूरख खल कामी” for “मैं मूरख फलकामी”. Many families close with an extra verse beginning “तन मन धन सब कुछ है तेरा”.

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